पूजा की विधि : इस दिन चंद्रमा की किरणों से अमृत टपकता है और ये किरणें सभी के लिये बहुत लाभदायक होती हैं. शरद पूर्णिमा के दिन सुबह अपने पूर्वजो माता पिता गुरुदेव इष्ट देवता का ध्यान करते हुए पूजा अर्चना करनी चाहिए. शाम में चंद्रोदय के समय चांदी या मिट्टी से बने घी के दिए जलायें. प्रसाद के लिए घी युक्त खीर बना लें. चांद की चांदनी में इसे दो से तिन घंटे रखें.इसके पश्चात गुरुदेव अपने इष्ट देव को भोग लगाने के बाद इसे ग्रहण करना चाहिये या अगले दिन प्रसाद रूप में नाश्ते में भी ले सकते है|
ज्योतिष के अनुसार पूर्णिमा(Sharad Purnima) का महत्व :ज्योतिष की मान्यता के अनुसार पूरे साल में सिर्फ इसी दिन चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होकर धरती पर अपनी अद्भुत छटा बिखेरता है. रात में खीर बनाकर खुले आसमान के नीचे रखकर अगले दिन सुबह उसे प्रसाद के रूप में खाते हैं. इस अवसर पर सर्वाथ सिद्धि योग भी बना हुआ है. ग्रहों और नक्षत्रों का यह संयोग बहुत ही शुभ है जिसमें धन लाभ संबंधी कोई भी काम करना शुभ फलदायी रहेगा.
चंद्र देव की पूजा : शरद पूर्णिमा पर चंद्र दोष से पीड़ित लोगों द्वारा विधविधान से पूजा करने से विशेष लाभ मिलता है। चंद्र देव प्रसन्न होकर उनके सभी दोष दूर करते हैं।
वहीं ” दधिशंखतुषाराभं क्षीरोदार्णव सम्भवम । नमामि शशिनं सोमं शंभोर्मुकुट भूषणं ” मंत्र का जाप करने से जीवन में खुशियां बरसेंगी। इस रात चंद्र देव की किरणों से स्वास्थ्य लाभ होता है।
अलग अलग मान्यताओं शाश्त्रो व ज्ञानियों के अनुसार खीर बनाकर खाने की परम्परा विधि विधान है परन्तु मैं साधारण परिवार से हूँ इस लिए अपने बचपन को याद करने की कोशिश की तो याद आया मेरे नानी दादी के यँहा हर वर्ष इस दिन रात को खीर बनाकर खाने की रीत चली आरही है जिसे साथ ही इस खीर को सुबह भी खाया जाता था साथ ही एक बात जो नोटिस कर पाया वो ये की इस दिन खीर हर हाल में पीतल या जिनके यँहा किसी कारण पीतल के पात्र नहीं होते थे वो मिट्टी के पात्र में बनाते थे साथ ही गुड़ का ही उपयोग होता था चीनी का नहीं साथ ही मेरी दादी नानी हमे पूजा पाठ के बाद चाँदनी रात में समय लगभग रात के 12 बजे के बाद ही होता था आँगन में बैठा कर बड़े प्यार से केले के पत्ते या मिट्टी की प्लेट में ही खाने को देती थी आज जब इसके महत्व के लिए पोस्ट लिख रहा हूँ
अन्य ज्ञानियों के ज्ञान की नकल कर तो एहसास हो रहा है कि हमारी परंपरा रीति रिवाजों में स्वास्थ्य समृद्धि हेतु विज्ञान व अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाये रखने का ज्ञान विचार निहित है
कई ज्ञानियों के लेख विधि विधान पढ़े कोई अलग अलग औषधि व अलग अलग तरीके बता रहे हैं मेरा मानना है परंपरा को जीवित रखे उसे डर व व्यवसाय का साधन न बनाये खीर बनाना व खाना जरूरी है न कि उसे इस कद्र बनाने की विधि विधान हो जिसे करने वाला भी इंसान न कर पाये जो करने वाले व आस्था होगी वो विधि विधान से करेंगे और जो नहीं उनसे इतनी ही विनती है खीर का सेवन जरूर करें जिस प्रकार करें
प्यार व लग्न शुद्ध सात्विक से बनाया व परोसा गया हर भोजन अमृततुल्य है |
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